मुझको रास आ गया है तुम्हारा शहर
मेरे दिल में बसा है तुम्हारा शहर
कल तक तो हम अजनबी यहाँ
हम मिले , बन गया यह हमारा शहर
हमने मिल के लिखी जो इबारत नई
पढ़ते पढ़ते थका है हमारा शहर
तुम थे यहाँ थी हँसीं वादियाँ
अब उदासी भरा है हमारा शहर
फिर से आ जाओ तुम सुन के मेरी सदा
तेरी राह देखता है हमारा शहर
झिलमिलाती रही 'विकास' की रश्मियाँ
फिर भी पिछड़ा हुआ है हमारा शहर ....
मेरे दिल में बसा है तुम्हारा शहर
कल तक तो हम अजनबी यहाँ
हम मिले , बन गया यह हमारा शहर
हमने मिल के लिखी जो इबारत नई
पढ़ते पढ़ते थका है हमारा शहर
तुम थे यहाँ थी हँसीं वादियाँ
अब उदासी भरा है हमारा शहर
फिर से आ जाओ तुम सुन के मेरी सदा
तेरी राह देखता है हमारा शहर
झिलमिलाती रही 'विकास' की रश्मियाँ
फिर भी पिछड़ा हुआ है हमारा शहर ....
