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Monday, 9 January 2023

वह धीरे धीरे मरने लगता है

 “ वह धीरे धीरे मरने लगता है ”

                     -  मार्था मेदिरोस 

                      अनुवाद- विकास 'विदीप्त' 


वह धीरे धीरे मरने लगता है

जो करता नहीं विचारों का आदान प्रदान। 

जो  अपने अंतर्विरोधों का सामना नहीं करता। 


जो गुलाम है अपनी आदतों का 

जो जीता है एक ही दिनचर्या

जो  बदलता नहीं अपनी रफ़्तार

जो उठाता नहीं जोखिम 

जो पहनता नहीं अलग रंगों के वस्त्र

जो नहीं करता बात अपरिचितों से 

वह धीरे धीरे मरने लगता है । 


वह स्त्री या वह पुरुष

जो दूर भागता है अपने जूनून से।

जो भावनाओं की गर्मजोशी से अधिक

'मैं' को महत्व देता है। 

वे भावनाएं जो 

वापस ला सकती हैं 

किन्हीं आँखों को चमक,

उबासी को मुस्कान में बदल सकती हैं

जोड़ सकती हैं टूटे हुए हृदय को। 


जिसे श्वेत से अधिक स्याह पसंद है

वह धीरे धीरे मरने लगता है । 


जो नहीं रखता कभी भी 

चीजों को अस्त व्यस्त 

जो असंतुष्ट रहता है अपने कार्य से।

अपना लक्ष्य पाने के लिए 

जो नहीं लेता जोखिम 

अनिश्चित के लिए निश्चित को छोड़ने का। 


जो जीवन में कम से कम एक बार 

अवहेलना नहीं करता 

किसी उचित सलाह की

वह धीरे धीरे मरने लगता है l 


जो करता नहीं यात्रा 

जो कुछ पढता नहीं

जो नहीं सुनता संगीत 

वह स्त्री जो नहीं पाती खुद में कोई लावण्य 

वह पुरुष जो नहीं देख पाता स्वयं में आकर्षण 

वह धीरे धीरे मरने लगता है l 


वह, जिसने नष्ट कर लिया है आत्मसम्मान

जो नहीं ले पाता किसी से सहायता

जो अविरल वृष्टि को अपना दुर्भाग्य मान कर

गँवा देता है पूरा दिन l

वह धीरे धीरे मरने लगता है l 


वह स्त्री या पुरुष 

जो रोक देता है कोई कार्य 

शुरू करने के पूर्व ही ।

जो अज्ञानता मिटाने के लिए 

प्रश्न नहीं पूछ पाता। 

वह स्त्री या पुरुष 

जो पूछने पर भी नहीं देता वह जवाब 

जो उसे निश्चय ही ज्ञात है l

वह धीरे धीरे मरने लगता है l 


आइये! किश्तों में आनेवाली मृत्यु को 

हम दूर भगाएँ।

याद रहे! 

जीवित रहने के लिए 

केवल सांस लेते रहने से ज्यादा बड़े 

प्रयास की आवश्यकता है l 


केवल प्रबल धैर्य से प्राप्त होगा भव्य हर्ष l 


             - मार्था मेदिरोस

          (अनुवाद- विकास विदीप्त)