~:होली:~
होली हुई सतरंगी सखी!
मेरी होली हुई सतरंगी।
श्याम-हरी संग रंगी सखी!
मेरी होली हुई सतरंगी।
कमल-नयन-रतनार निराले।
सो हैं कृष्ण पीताम्बर डाले।
देख छटा बहुरंगी!
देख छटा बहुरंगी सखी!
मेरी होली हुई सतरंगी।
लोहित अधर, गाल पर लाली।
सुन वंशी की धुन मतवाली।
होली मची अंतरंगी!
होली मची अन्तरंगी सखी!
मेरी होली हुई सतरंगी।
प्रेम रंग भर भर कर डारी।
भींजत गोवर्धन गिरधारी।
जगत रंग ना रंगी!
जगत रंग ना रंगी सखी!
मेरी होली हुई सतरंगी।
- विकास 'विदीप्त'

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