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Tuesday, 17 January 2017

धीरे धीरे मरना

ब्राजील की पुर्तगाली भाषा की पत्रकार कवयित्री  मार्था मेदिरोस  की एक कविता इन दिनों सोशल मीडिया पर खूब घूम  रही है । परेशानी यह है कि यह पाब्लो नेरुदा की रचना बताई जा रही है जबकि नेरुदा फाउंडेशन भी भूल सुधार करने की अपील कर चुका है । परेशानी यह कि मूल रचना से अंग्रेजी, फिर अंग्रेजी से हिंदी में रूपांतरित और सोशल मीडिया पर भारत में वायरल हुई इस कविता के हिंदी रूपांतर में बहुत कुछ छूट गया था । मैंने एक लघु प्रयास किया है यदि अच्छा लगे तो प्रोत्साहन जरूर दें  ।
 हाँ , आप इसे व्हाट्सएप्प पर भी शेयर कर सकते हैं ।

   “ वह धीरे धीरे मरने लगता है ”
                     -  मार्था मेदिरोस
                      अनुवाद- विकास पाण्डेय

वह, जो बन जाता है दास अपनी आदतों का
जो जीता रहता है एक ही दिनचर्या,
जो  बदलता नही अपनी रफ़्तार
जो उठाता नही जोखिम ,
जो परिवर्तित नही करता अपने वस्त्रों के रंग
जो नही करता बात अपरिचितों से
वह धीरे धीरे मरने लगता है l

वह स्त्री या वह पुरुष, जो दूर हट जाता है अपने जूनून से
और जो भावनाओं की गर्मजोशी से अधिक,
स्वत्व को महत्व देता है
ऐसी भावनाएं,
जो वापस ला सकती हैं किसी की आँखों को चमक
उबासी को मुस्कान में बदल सकती हैं,
जोड़ सकती हैं चकनाचूर हुए ह्रदय को l
जिसे श्वेत से अधिक स्याह पसंद है
वह धीरे धीरे मरने लगता है l

वह, जो नही रखता कभी भी चीजों को अस्त व्यस्त
जो असंतुष्ट रहता है अपने कार्य से
अपने किसी स्वप्न का पीछा करते हुए जो नही लेता जोखिम
अनिश्चित के लिए निश्चित को छोड़ने का
जो जीवन में कम से कम एक बार
अवहेलना नही करता किसी उचित सलाह की
वह धीरे धीरे मरने लगता है l

जो करता नही यात्रा, जो कुछ पढता नही है
जो नही सुन पाता संगीत
वह स्त्री जो नही पाती खुद में कोई लावण्य
वह पुरुष जो नही देख पाता स्वयं में आकर्षण
वह धीरे धीरे मरने लगता है l

वह, जिसने नष्ट कर लिया है आत्मसम्मान
जो नही करने देता किसीको अपनी सहायता
जो अविरल वृष्टि को अपना दुर्भाग्य मान कर
बिता देता है पूरा दिन l
वह धीरे धीरे मरने लगता है l

वह स्त्री या पुरुष
जो छोड़ देता है कोई कार्य उसे प्रारंभ करने के पूर्व ही
जो अज्ञानता मिटाने के लिए प्रश्न नही पूछ पाता l
वह स्त्री या पुरुष
जो पूछने पर भी नही देता जवाब
जो उसे निश्चय ही ज्ञात है l
वह धीरे धीरे मरने लगता है l

आइये हम किश्तों में आनेवाली मृत्यु को दूर भगाएं
यह याद दिला कर, कि जीवित रहने के लिए
सामान्यतः सांस लेते रहने की अपेक्षा
कही वृहत्तर प्रयास आवश्यक है l

केवल प्रबल धैर्य से होगी
भव्य हर्ष की उपलब्धि l
- मार्था मेदिरोस

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