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Tuesday, 17 January 2017

सैन्टा क्लॉज़

हे सैंटा!
एक बार आना मेरे घर भी।

ले आना एक ऐसी साड़ी
जिसमें मेरी माँ लगे और सुन्दर ।
पापा के लिए ले आना नए जूते
या उनके पुराने जूतों को
कर देना नया अपने जादू से।

हमारे कम्बल को कर देना
थोड़ा और बड़ा
बना देना थोड़ा और गर्म
जिसमें छुप जाने पर सुनाई न दे
कुत्तों का रोना और नही लगे ठंढ ।

दीदी के लिए नई किताबें लाना
अपनी छोटी फ़ोटो चिपका कर ।
जिसपर दीदी लिखेगी अपना नाम
और पढ़ेगी जोर जोर से बोलकर
बड़े साहेब की बेटी की तरह।

मेरे लिए ले आना
एक पूरी बाँह का स्वेटर
भले मत लाना बिस्कुट या टॉफियां।
लेकिन !
क्या तुम मेरे घर आ सकते हो ?

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