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Tuesday, 9 October 2018

भूमंडलीकरण के सामाजिक-सांस्कृतिक पक्ष



 भूमंडलीकरण आज के युग का एक जाना पहचाना शब्द है जिसका सरल अर्थ है विश्व के विभिन्न क्षेत्रों का एक दुसरे से जुड़ना, समीप आना। जैसे-जैसे परिवहन और संचार के साधनों का उत्तरोत्तर विकास हो रहा है,  दुनिया के विभिन्न कोने एक दूसरे से घनिष्ठ रूप से जुड़ते जा रहे हैं। अर्थात मानव विकास के साथ साथ विश्व का एकीकरण हो रहा है। संसार का हर कोना दूसरे कोनों को, हर देश दूसरे देशों को, और हर महादीप दूसरे महाद्वीपों को समाज-संस्कृति, भाषा-साहित्य और धर्म-दर्शन के सन्दर्भ में प्रभावित और संक्रमित करता रहा है। विश्व के वरिष्ठ पत्रकार और फिल्म निर्माता जॉन पिल्गर का मानना है कि भुमंडलीकरण पत्रकारों और राजनेताओं द्वारा स्थापित और प्रयुक्त एक शब्द है जो एक वैश्विक गाँव की और संकेत करता है। यह एक अकाट्य सत्य है कि आज पूरी दुनिया एक वैश्विक गाँव बन चुकी हैI

 विश्व के सिमटने की यह प्रक्रिया तभी से चल रही है जब पृथ्वी पर मानव का उद्भव हुआ। जब मनुष्य ने स्थायी जीवन जीना प्रारंभ किया तो इस प्रक्रिया में गति आई। हालाँकि मानव के एक दूसरे से जुड़ने की यह प्रक्रिया बहुत धीमी थी और लघु क्षेत्रों तक ही प्रभावी रही। अतीत में अपनी भाषा और संस्कृति से अलग व्यक्ति को विदेशी की संज्ञा दी जाती थी। परन्तु  धीरे धीरे यह भेद मिटने लगा। यातायात साधनों के विस्तार, आवश्यकताओं में वृद्धि और बढ़ते संचार साधनों ने दुनिया के सिमटने की प्रक्रिया को त्वरित किया । जहाँ तक हमारे भारत का प्रश्न है, यह चिर काल से वैश्वीकरण का प्रेरक और साक्षी दोनों रहा है । भारत ने सदा दुनिया को एक परिवार की तरह देखा है । इस सन्दर्भ में भारत की विचारधारा का एक उदहारण देखिए-
      अयं निजः परोवेति गणना लघुचेतसाम ।
      उदारचरितानाम तु वसुधैव कुटुम्बकम ।।

 भूमंडलीकरण ने मानव जीवन के प्रत्येक पक्ष को प्रभावित किया है। समाज और संस्कृति को, भाषा और साहित्य को, धर्म को और अर्थव्यवस्था को। हाँ, यह अवश्य कहना होगा कि देश काल और परिस्थितियों के अनुसार इसका प्रभाव बदलता रहा है ।  भूमंडलीकरण का फल विकसित देशों के लिए कुछ और रहा है तो विकासशील और अविकसित देशों के लिए कुछ और ; अंग्रेजी के लिए कुछ और तो हिंदी के लिए कुछ और; संपन्न लोगों के लिए कुछ और तो विपन्न लोगों के लिए कुछ और।  यह कहीं लाभदायक रहा, कहीं निराशाजनक तो कहीं मिश्रित फलदायी I

  जब यूरोप में पुनर्जागरण आया तो मानव विचार और चिंतन का केंद्र विन्दु बन गया  बीसवीं शताब्दी तक मानव कल्याण की अवधारणा वहां परिपक्व रूप ले चुकी थी । प्रथम विश्वयुद्ध के दौरान जब एशियाई देशों के सिपाही यूरोप गए तो उन्होंने यूरोपीय समाज के मानवीय संवेदना और वैचारिक सतह पर मानव-मात्र की प्रधानता को देखा और वापस आ कर अपने देशों में इस विचारधारा का प्रसार किया । यह समाज पर भूमंडलीकरण के सकारात्मक प्रभाव का एक उदहारण है ।

इतिहास में दो कुख्यात बीमारियों की चर्चा है- एक मवेशी रोग रिंडर पेस्ट और दूसरी चेचक I रिंडरपेस्ट को ‘मवेशियों का हैजा’ और ‘युद्ध की बीमारी’ की संज्ञा दी जाती है I यह बीमारी 19वीं शदी में एशिया से अफ्रीका आई I ध्यातव्य है कि अफ़्रीकी लोग अपने यूरोपीय मालिकों के लिए काम करने के लिए तैयार नहीं थे, आकर्षक वेतन पर भी नहीं । वे पशुपालन और पशुचारण पर आधारित अपने जीवन से प्रसन्न थे । पर, जब उक्त संक्रामक बीमारी ने अफ्रीका में प्रवेश किया तो हिन्द महासागर तट से अटलांटिक तट तक अपने रास्ते में आने वाले 90% मवेशियों को मौत की नींद सुला दिया। वहां के मूल निवासियों की आर्थिक कमर टूट गयी और इस तरह एक मवेशी-रोग ने  अफ्रीकियों को उपनिवेशवादियों का दास बना दिया।

 कुछ ऐसा ही खेल चेचक नाम की बीमारी ने मध्य अमेरिका के माया और एजटेक सभ्यताओं के निवासियों के साथ खेला। अमेरिकियों के लिए चेचक एक नई बीमारी थी जिसकी प्रतिरोधक क्षमता उनके शरीर में नहीं थी। इस बीमारी ने उपरोक्त दोनों सभ्यताओं के निवासियों के लिए कोलंबस के शस्त्रास्त्र का कार्य किया, लाखों मूल निवासी इस संक्रामक रोग से काल-कवलित हो गए और कोलम्बस की विजय-राह आसान हो गयी ।

 भूमंडलीकरण की चर्चा में ‘रेशम मार्ग’ अत्यंत उल्लेखनीय है। यह एक प्राचीन ऐतिहासिक  व्यापार मार्ग था जो पूर्वी एशिया को यूरोप से जोड़ता था। इसने एशिया और यूरोप को आर्थिक सूत्र में बांधने का कार्य कियाI व्यापार में रेशम की अधिकता के आधार पर इस अंतरमहाद्विपीय मार्ग का नामकरण हुआ था। इसका महत्व मार्कोपोलो के समय तक बना रहा।  रेशम मार्ग का केवल आर्थिक महत्व ही नहीं रहा वरन यह सांस्कृतिक दृष्टि से भी बहुत महत्वपूर्ण था। इतिहास के साक्ष्य बताते हैं कि इस मार्ग का अनुसरण बौद्ध प्रचारकों, इसाई मिशनरियों और मुस्लिम आक्रान्ताओं ने भी कियाI यह मार्ग एशिया में सांस्कृतिक-धार्मिक उथल पुथल और परिवर्तन का सूत्रधार रहा है। रेशम मार्ग कभी बौद्ध धर्म के उत्थान में तो कभी इस्लाम के प्रसार सहायक रहा, साथ ही भूमंडलीकरण का पर्याय भी।

  लिओनार्दो दा विन्ची की मोनालिसा की सम्मोहक स्मित का कायल कौन नहीं! मध्यकालीन इटली से निकल कर इस अप्रतिम पेंटिंग की प्रतिकृतियाँ आधुनिक साज सज्जा का  अभिन्न हिस्सा बन चुकी हैं।
  यह भूमंडलीकरण की ही देन है कि बराक ओबामा दीपावली मनाते तो ट्रम्प वैदिक मंत्रोचार सुनते दिख जाते हैं; रूस की कोई गायिका बिहार की छठ पूजा के गीत गाते सुनी जाती है तो भारतीय युवक युवतियाँ पश्चिमी रैप व टैप नृत्य करते हुए दिख जाते हैं।  सिंजो आबे गंगा आरती के समय प्रणाम की मुद्रा में हाथ जोड़े दिखे थे तो उसे भारत-जापान की सांस्कृतिक निकटता की बानगी माना गया था। कैरिबियाई गंगनम का वैश्विक प्रसार और पूरी दुनिया में सांता क्लॉस की लोकप्रियता भूमंडलीकरण का ही प्रतिफल है।

  ब्रिटेन की अंग्रेजी आज अमेरिकन इंग्लिश, इंडियन इंग्लिश, ऑस्ट्रलियन इंग्लिश आदि कई रूप धारण कर विश्वव्यापिनी हो गई है। अंग्रेजी जहाँ जहाँ गयी, वहां की स्थानीय भाषा के लिए चुनौती बन गई। इसके प्रभाव में कुछ भाषायें लुप्त हो गयीं तो कुछ और सशक्त होकर उभरीं।  तुलसीदास और शेक्सपियर तथा कालिदास और मिल्टन की तुलना का विमर्श भूमंडलीकरण का ही प्रतिफल है। भारत की हिंदी व चीन की मंदारिन बाज़ार के बूते न केवल बलवती हुई हैं बल्कि इनकी अंतर्राष्ट्रीय स्वीकार्यता बढ़ी है।  ए आर रहमान निर्देशित ‘जय हो’ मुखड़े वाला  एक लोकप्रिय गीत इंग्लैंड पहुँच गयाI  केवल वहां पहुंचा ही नही, ‘जय हो’ ऑक्सफ़ोर्ड के अंग्रेज़ी शब्दकोष में भी घुस गया। यह है भूमंडलीकरण का कमाल।

 हमें यह स्वीकार करना होगा कि  इस भूमंडलीकरण ने अनेक चुनौतियों को जन्म दिया है।  विलग संस्कृतियों का अंधानुकरण और प्रतिभा का पलायन  जैसी कई समस्याएँ इसी की देन हैं। ये चुनौतियाँ अनेक देशों, विशेषकर विकासशील एवं पिछड़े , में विद्यमान हैं।  आतंकवाद आज वैश्विक समस्या बन कर उभरा है। साथ ही भूमंडलीकरण के फलस्वरुप इबोला और जिका जैसे विषाणुओं का प्रसार घातक रूप से बढ़ा है। कहा तो यह भी जा रहा है कि क्षेत्रीय असंतुलन तथा निर्धनता और सम्पन्नता के बीच बढती खाई को भी वैश्वीकरण ने ही विस्तारित किया है। हमे इन चुनौतियों के समाधान का मार्ग खोजना होगा।

  मानव समुदायों के मिलन से जन्मी सकारात्मक उर्जा नए आविष्कारों, रचनाओं एवं कृतियों का मार्ग प्रशस्त करेगी, हम सभी ईश्वर से यह कामना करें।
                                    - विकास

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