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Monday, 27 August 2018

कजरी

हरे रामा चिहुँ चिहुँ बोले चिरइया
             मोरे अँगनइया ए हरी।

सुनि बोल हिया हरषाये
मन मोर मगन हुए जाये
हरे रामा चली मन्द पुरवइया
             मोरे अँगनइया ए हरी।

रिमझिम बरसत है बदरिया
भींजत फुलवा फुलवरिया
हरे रामा बन गई प्रीत-तलइया
              मोरे अँगनइया ए हरी।

सावन घनश्याम जु आये
मन  राधा बन  इठलाये
हरे रामा होत है रास-रचइया
              मोरे अँगनइया ए हरी।
हरे रामा चिहुँ चिहुँ बोले चिरइया
              मोरे अँगनइया ए हरी।

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